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सिक्योरिटी

 कॉन्टॅक्ट रेग्यूलेशन एक्ट १९५६ में ‘सिक्योरिटीज’ को परिभाषित किया गया है।


इस में शेअर, बाँड, स्क्रिप्ट अथवा उसी तरह की किसी भी कंपनी अथवा कॉर्पोरेट संस्था या सरकार द्वारा इश्यु किए और बाजार में बेचे जा सके ऐसे अन्य सिक्योरिटीज का समावेश किया जाता है।


सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव्ह इन्स्टूमेंट, बचत योजनाओं ने एकत्रित किए युनिट, सिक्योरिटीज में किए निवेश पर मिलने वाला ब्याज, राईट सिक्योरिटीज और साथ ही साथ केंद्र सरकार द्वारा सिक्योरिटीज के नाम से घोषित किए रिसिप्ट अथवा उन जैसे ही अन्य इन्स्ट्रमेंट का इसमें समावेष किया गया है।



 

सिक्योरिटी मार्केट के निवेशक शेअर, डेब्ट इन्स्ट्रुमेंट, डेरिवेटिव्हज प्रोडक्ट और म्युच्युअल फंड के युनिट वगैरह में निवेश कर सकते है।


सिक्योरिटीज मार्केट  – Securities Market in Hindi.

सिक्योरिटी मार्केट एक ऐसी जगह है, जहाँ पर खरीददार और विर्केता शेर, बाँड और डिबेंचर वगैरह की खरीदी और बिक्री का सौदा कर सकते है।


साथ ही मार्केट कॉर्पोरेट, व्यापार उदयोग क्षेत्र के साहसी लोगों को उनके कंपनी और व्यापार के लिए पैसा जुटाने का जरिया दिलाने की महत्व की भूमिका निभाते है।


इस बाजार के माध्यम से जिन लोगो के पास निष्क्रिय धन उपलब्ध है उन निवेशकों के पास से वह निष्क्रिय धन जिन्हे जरूरत है उन कॉरपोरेट जगत के लोगो के पास ट्रान्सफर किए जा सकता है।


सिक्योरिटी मार्केट के माध्यम से यह कार्य बहुत आसानी से किया जा सकता है। सिक्योरिटी मार्केट निवेशकों को बचत के रूपयों से कितना हिस्सा बचत के लिए और कितना हिस्सा व्यापार के लिए इस्तमाल करना चाहिए इसके लिए मार्गदर्शित करती है।



 

बचत को निवेश से जोडने वाली अलग अलग मध्यस्थी संस्थाद्वारा इश्यु किए गए असंख्य आर्थिक प्रोडक्टस को सिक्योरिटी के नाम से पहचाना जाता है।


सिक्युरिटी मार्केट के विभाग – Segments of Securities Market in Hindi.

सिक्युरिटी मार्केट के दो स्वतंत्र विभाग है। उनमें नए इश्यु का मार्ग उपलब्ध कर देनेवाला प्रायमरी मार्केट का और शेअर बाजार में पहले से ही लिस्ट हए शेअर अथवा अन्य इन्स्ट्रमेंट का दुबारा लेनदेन करने का मार्ग उपलब्ध करके देनेवाले सेकंडरी मार्केट का समावेश होता है।


प्रायमरी मार्केट कंपनी द्वारा इश्यु होने वाले नए सिक्योरिटीज की बिक्री के लिए मार्ग उपलब्ध करता है।


जहा सेकंडरी मार्केट कंपनी द्वारा पहले इश्य किए सिक्योरिटीज पर व्यवहार करने के लिए मार्ग उपलब्ध करता है।


प्रायमरी मार्केट – Primary Market in Hindi.

प्रायमरी मार्केट एक ऐसा स्थान है, जहाँ पर इनिशिअल पब्लिक ऑफर (आय.पि.ओ) के माध्यम से नई सेक्युरिटीस की बिक्री की जाती है।



 

दुसरे शब्दों में कहना हो तो प्रायमरी मार्केट नए सिक्युरिटीस की बिक्री के लिए मार्ग उपलब्ध कराता है। राज्य और केंद्र सरकार की कंपनीयों और कुछ प्राइवेट कंपनीयों के जरिए नई सिक्योरिटी इश्यु की जाती है।


कॉर्पोरेट कंपनीयाँ मूल किमत पर अथवा उन पर प्रीमियम याने अधिक रकम लागू करके अथवा डिस्काउंट देकर सिक्युरिटीस इश्यु करते है।


वह शेअर अथवा डेब्ट के स्वरूप में इस सिक्योरिटीज को इश्यु करते है। यह कंपनीयाँ स्थानिक बाजार में अथवा आंतरराष्ट्रीय बाजार में सिक्योरिटी इश्यु कर सकते


सेकंडरी मार्केट – Secondary Market in Hindi.

सेकंडरी मार्केट यह एक ऐसा स्थान है, जहा पर प्रायमरी मार्केट में इनिशिअल पब्लिक ऑफर के जरिए बेची गई सिक्योरिटीज का दुबारा खरीदी बिक्री अथवा ट्रेडींग करने का कार्य किया जाता है। स्टॉक एक्सचेंज के जरिए शेअर बाजार में लिस्ट हुई कंपनीयों के सिक्योरिटीज का भी सेकंडरी मार्केट में ही व्यवहार किया जाता है।



 

सिक्योरिटी का बडे पैमाने पर ट्रेडिंग सेकंडरी मार्केट में किया जाता है। सेकंडरी मार्केट में इक्विटी मार्केट और डेब्ट मार्केट का समावेश होता है।


डेरिवेटिव्हस मार्केट – Derivatives Market in Hindi.

सेकंडरी मार्केट से फॉरवर्ड मार्केट जरा अलग है। इस बाजार को डेरिवेटिव्हस मार्केट कहके भी जाना जाता है।


इस बाजार में सिक्योरिटीज का ट्रेडिंग किया जाता है परंतु उनकी डिलीवरी अथवा पेमेंट भविष्य में देना पडता है।


डेरिवेटिव्हस के बाजार में फीलहाल फॉरवर्ड के जो व्यवहार किए जाते है वह फ्युचर्स और ऑप्शन के व्यवहार है। फ्यूचर्स के मार्केट में स्टॅन्डर्ड सिक्योरिटिस का ही ट्रेडींग किया जाता है।


यह ट्रेडिंग करनेवालो को भविष्य में डिलीवरी अथवा सेटलमेंट व्यवहार चुकता करना पड़ता है। फ्यचर्स के व्यवहार किसी भी व्यक्तिगत सिक्योरिटि पर अथवा किसी भी इन्डेक्स पर हो सकते है।



 

ऑप्शन के विषय में बताना हो तो भविष्य में डिलीवरी लेने की शर्तो सहित सिक्योरिटीज का भी ट्रेडिंग किया जाता है।


शेअर बाजार – Stock Exchange in Hindi.

शेअर का बडे पैमाने पर ट्रेडिंग शेअर बाजार में किया जाता है। शेअर बाजार एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहा शेअर की खरीदी का और बिक्री का भाव निश्चित करके व्यवहार किया जाता है।


पहले शेअर बाजार एक स्थान हुआ करता था। शेअर बाजार के ट्रेडिंग फ्लोर पर लेन देन किया जाता था।


आपने कभी चित्रों में ट्रेडिंग फ्लोर देखा होगा। इस ट्रेडिंग फ्लोर पर लोगो को हाथ ऊँचे करके जोर जोर से चिल्लाकर साथ ही एक दुसरे को संकेत करके व्यवहार करते हुए देखा होगा।


शेअर बाजार में व्यवहार करने का यह एक पुराना तरिका था। यह प्रथा अस्तित्व में नही है। फिलहाल वर्चुअल ट्रेडिंग फ्लोर में कम्प्युटर के नेटवर्क का समावेश होता है।



 

इस नेटवर्क के जरीए दुनियाभर के देशो में ट्रेडिंग के लिए इसी सिस्टम का उपयोग किया जाता है।


शेअर बाजार का मूलभूत हेतू खरीददार और विक्रेता के सिक्योरिटिस का व्यवहार पूर्ण होने के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध कराना और जोखिम को कम करना है।


शेअर बाजार में प्रायमरी और सेकंडरी ऐसे दो बाजार होते है। प्रायमरी मार्केट में नई सिक्योरिटीज इश्यु की जाती है और फिर उनका एक अस्तित्व निर्माण होने के बाद उन सिक्योरिटिस का व्यवहार सेकंडरी मार्केट में होता है। शेअर बाजार के माध्यम से यह व्यवहार पुरा होता है।


भारतीय स्टॉक एक्सचेंज – Stock Exchanges in India in Hindi.

भारत में कुल २४ स्टॉक एक्सचेंज है। इन सभी को भारत सरकार ने मान्यता दी है। उनमें से सबसे बडे और महत्व के बाजार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन.एस.ई), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बी.एस.ई) का समावेष होता है।


भारत के शेअर बाजार में हर दिन होनेवाले ट्रेडिंग में बड़े पैमाने की ट्रेडिंग एन.एस.ई और बी.एस.ई के जरिए ही होती है।



 

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज – एन.एस.ई (National Stock Exchange – NSE):-

१९९४ में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज शुरू किया गया। यह एक्सचेंज शुरू करने के पिछे का हेतू आगे दिया है।


राष्ट्रीय स्तर पर इक्विटी डेब्ट और इन जैसे अन्य इन्स्टूमेंट का व्यवहार कर पाना।

देशभर के निवेशकों को एकसाथ में व्यवहार करने का मौका प्राप्त करना।

सिक्योरिटिस के व्यवहार में आसानी लाने के लिए। व्यवहार कार्यक्षम होना चाहिए इसलिए और उनमें पारदर्शकता आए इसलिए।

व्यवहार के सेटलमेंट साइकिल अर्थात कालावधी कम करने के लिए।

सिक्योरिटिस के मार्केट के उद्देशो को आंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए।

यह एक्सचेंज बिना ट्रेडिंग रिंग वाले राष्ट्रीयस्तर के कम्प्युटराइज शेर बाजार के ही स्वरूप में रहे इसलिए।

यह एक्सचेंज दो हिस्सो में विभाजीत किया है। एक कॅपिटल मार्केट और दुसरा होलसेल डेब्ट मार्केट।


कॅपिटल मार्केट के हिस्से में इक्विटी शेर, कन्वर्टिबल डिबेंचर्स और नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर्स का समावेष होता है।


होलसेल डेब्ट मार्केट में सरकारी डेब्ट, जाहिर क्षेत्र की कंपनीयो के बाँड, कमर्शिअल पेपर्स और डेब्ट के अन्य इन्स्ट्रमेंट के उच्च किमत के व्यवहारों का कामकाज होता है।


कॅपिटल मार्केट से संबंधित ट्रेडिंग मेंबर्स मुंबई में स्थापित किए गए मध्यस्थ कम्प्युटर के द्वारा जुडे होते है। इसके लिए वेरी स्मॉल ॲपर्चर टर्मिनल्स याने की वी-सेट (V-SAT) का उपयोग किया जाता है।



 

उसी तरह होलसेल डेब्ट मार्केट से संबंधित ट्रेडिंग मेंबर भी मुंबई में स्थापित हुए मध्यस्थ कम्प्युटर के जरिए हायस्पिड लाइन्स के द्वारा एक दुसरे से संबंध जोडते है।


नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑर्डर पर आधारीत सिस्टम का उपयोग करता है। उनके सिस्टम में ट्रेडिंग मेंबर द्वारा ऑर्डर दिया जाता है तब अपने आप ऑर्डर कन्फरमेशन स्लिप अर्थात ऑर्डर दिया है यह निर्देशित करनेवाली रसीद तैयार की जाती है।


उसमें दी हुई सिक्योरिटिस की संख्या, कौनसी किमत पर निवेशक सिक्योरिटीज बेचना चाहते है और सामने से किसी भी पक्ष ने उनकी खरीदी की हो तो उस पक्ष का कोड नंबर भी इस स्लिप में दर्ज किया जाता है। इस तरह का यह सिस्टीम है।


एन.एस.ई में स्क्रिप्ट को उनके प्रतीक चिह्न से पहचाना जाता है। उदा. इन्फोसिस टेक का प्रतीक चिह्न INFOSYSTCH है। एन.एस.ई का इन्डेक्स निफ्टी है।


बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज – बी.एस.ई (Bombay Stock Exchange – BSE):-

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यह एशिया का सबसे पुराना शेअर बाजार है। यह बी.एस.ई के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। १८७५ में द नेटिव शेअर और स्टॉक ब्रोकर असोसिएशन के नाम से इसकी स्थापना हई थी।



 

भारत सरकार से मान्यता हासिल करनेवाला यह देश का पहला एक्सचेंज है। भारत सरकार ने इसे १९५६ में सिक्योरिटिस कॉन्ट्रैक्ट रेग्युलेशन एक्ट १९५६ के अंतर्गत स्थायी स्वरूप की मान्यता दी थी।


यह एक्सचेंज भारतीय कॅपिटल मार्केट को विकसित करने में मुख्य और महत्व की भूमिका निभाता है। बी.एस.ई का इन्डेक्स सेंसेक्स है और इस इन्डेक्स पर विश्वभर की नजर होती है।


डेरिवेटिव्हस इक्विटी और डेब्ट इन्स्ट्रुमेंट में ट्रेडिंग करने के लिए यह एक्सचेंज कार्यक्षम और पारदर्शक बाजार तैयार करता है।


बी.एस.ई में स्क्रिप्ट को उनके कोड नंबर से पहचाना जाता है। उदा. इन्फोसिस टेक का बी.एस.ई कोड नंबर ५००२०९ है।


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